Paryavaran Diwas Essay

World Environment Day – 5th June

विश्व पर्यावरण दिवस – 5 जून

हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस ( World Environment Day (WED)) मनाया जाता है। यह दिन पर्यावरण के ज्वलंत मुद्दों के बारे में आम लोगों को जागरूक करने और इस दिशा में उचित कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र (United Nations) का प्रमुख साधन है।

देखा जाए तो ये दिन हमारे भविष्य के बारे में है। अगर हमारा पर्यावरण नहीं बचेगा तो हम भी नहीं बचेंगे। इसलिए Earth Day के साथ-साथ यह दिन बाकी सभी दिनों से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि बाकी दिन तभी मनाये जा सकते हैं जब उन्हें मनाने के लिए हम बचे रहें और विश्व पर्यावरण दिवस हमे बचाने की दिशा में एक बेहद ज़रूरी कदम है।

हर साल विश्व पर्यावरण दिवस किसी न किसी थीम को लेकर मनाया जाता है और 2017 की theme है-

“Connecting People to Nature”.

“लोगों को प्रकृति से जोड़ना”

विश्व पर्यावरण दिवस का इतिहास

सन 1972 अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण राजनीति का महत्त्वपूर्ण साल था क्योंकि इस साल 5 जून से 16 जून तक यूनाइटेड नेशंस के तत्वाधान में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में एनवायर्नमेंटल इश्यूज को लेकर पहली मेजर कांफ्रेंस की गयी। इस कांफेरेंसे को –

  • “कांफेरेंसे ऑन ह्यूमन एनवायरनमेंट” या
  • “स्टॉकहोम कांफेरेंसे” के नाम से भी जाना जाता है।

इस कांफेरेंसे का लक्ष्य मानव परिवेश को बचाने और बढ़ाने की चुनौती को हल करने के तरीके के बारे में एक बुनियादी आम धारणा तैयार करना था।

इसके बाद इसी साल 15 दिसंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) ने एक प्रस्ताव पारित किया और प्रति वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। तभी से प्रति वर्ष यह दिवस 100 से अधिक देशों में मनाया जाने लगा।

आधिकारिक तौर पर विश्व पर्यावरण दिवस पहली बार 5 जून 1974 को मनाया गया और तब इसकी थीम थी – “Only One Earth”

इस लेख को सिर्फ अपना ज्ञान बढ़ाने के लिए नहीं पृथ्वी को और खुद को बचाने के नज़रिए से पढ़ें….

आज धरती माँ रो रही है क्योंकि-

  • मनुष्यों की वजह से आज जीव-जंतुओं के विलुप्त होने की दर जितना होनी चाहिए थी उससे 1000 गुना अधिक है।

वैज्ञानिक कहते हैं कि –

20,000 से अधिक जीव-जंतु हमेशा के लिए विलुप्त होने की कगार पर हैं।

अगर आप 90s के पहले की generation हैं तो शायद आपको याद होगा कि जब हम छोटे थे तो हमारे घरों के आस-पास ढेरों गौरैया चहचहाया करती थीं…हम उन्हें पकड़ के रंगते भी थे…और जब माँ छत पर गेंहू सुखाती थी तो भी गेंहू के आस-पास मंडराया करती थीं…

इसी तरह शहर के मछली बाजारों के पास ढेरों गिद्ध मंडराया करते थे…कहाँ गए ये सब…हमने मोबाइल टावर के रेडिएशन, इंसेक्टिसाइड, पेस्टिसाइड के इस्तेमाल, अंधाधुंध शिकार, प्रदुषण और ऐसी ही अन्य चीजों से इन्हें ख़त्म कर दिया….

और इनकी क्या बात करें…अगर Save Tiger प्रोजेक्ट ना होता तो शायद आज भारत को कोई दूसरा National Animal खोजना पड़ता!

  • पूरे विश्व में हर साल करीब 55 लाख लोग दूषित हवा की वजह से मर जाते हैं, जो कुल मौतों का लगभग 10% है।
  • अकेले भारत में हर साल 12 लाख लोग ज़हरीली हवा के कारण मर जाते हैं, जिससे देश को 38अरब डॉलर का नुक्सान होता है। शायद आपको जानकार आश्चर्य हो भारत के 11 शहर दुनिया के सबसे अधिक प्रदूषित शहरों में शामिल हैं।
  • बेहिसाब पानी की बर्बादी के कारण भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है।

मैं गोरखपुर से हूँ और इस जैसा तराई इलाका भी इससे नहीं बचा है। लोगों को अपनी बोरिंग बढ़वानी पड़ रही है…कुछ इलाकों में गर्मी के मौसम में भूजल स्तर इतना नीचे चला जाता है कि पानी के लिए वाटर-टैंक्स पर निर्भर करना पड़ता है।

  • लगातार बढ़ते प्रदुषण से समुद्र भी नहीं बचे हैं…हम पर्यावरण में इतनी अधिक कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ रहे हैं कि समुद्र तक का पानी एसिडिक होता जा रहा है, हमने अपने घर बनाने के लिए इतने जंगल काट दिए हैं कि आज biodiversity बड़े खतरे में पड़ गयी है।
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  • Fertilizer के बेहिसाब इस्तेमाल ने खेतों को इतना ज़हरीला बना दिया है कि उनमे उगने वाली सब्जियां खाने से फायदे कम और नुक्सान ज्यादा हो रहे हैं।
  • Global warming अब सिर्फ बड़ी-बड़ी conferences का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि हम उसे खुद महसूस करने लगे हैं।
  • करोड़ों सालों से जमे ग्लेशियर्स आज जितनी तेजी से पिघल रहे हैं उतनी तेजी से कभी नही पिघले थे।

दोस्तों, ऐसी बातों की लिस्ट इतनी लम्बी है कि सभी को यहाँ व्यक्त नहीं किया जा सकता। बस इतना समझ लीजिये कि अगर हमने पर्यावरण को बचाने के लिए अभी से प्रयास नहीं शुरू किये तो शायद बाद में हमें इसका मौका भी ना मिले और आगे आने वाली पीढियां हमे इस गलती के लिए कभी माफ़ न करें!

क्या कर सकते हैं हम?

ये भूल जाइए कि सरकार क्या करती है क्या नहीं करती है….पड़ोसी क्या करता है क्या नहीं करता है….परिवार साथ देता है नहीं देता है….बस अपनी responsibility लीजिये…कि मैं एक change agent बनूँगा…मैं अपने स्तर से पर्यावरण को बचाऊंगा…

मैं यहाँ कुछ बातें और real life stories suggest कर रहा हूँ। आप को ज़रूर यहाँ से कुछ न कुछ आईडिया मिल जायेया।

1. 3 Rs को रखें याद:

  • Reduce (रिड्यूस):गाँधी जी ने कहा था-पृथ्वी सभी मनुष्यों की ज़रुरत पूरी करने के लिए पर्याप्त संसाधन प्रदान करती है, लेकिन लालच पूरी करने के लिए नहीं.

पर ज्यादातर लोग ज़रुरत से अधिक के चक्कर में पड़ जाते हैं…एक मोबाइल चल रहा है…लेकिन दूसरा चाहिए…एक कार सही है लेकिन दूसरी चाहिए…एक बाल्टी से नहा सकते हैं लेकिन पूरा बाथटब चाहिए…”

अगर पृथ्वी को बचाना है तो अपनी आदतों को सुधारना होगा…अपने फ़ालतू के usage को घटाना होगा।

  • Reuse (रियूज): बहुत सी चीजें हैं जिनका हम नहीं तो कोई और इस्तेमाल कर सकता है। जैसे कि पुराने किताबें, कपड़े, मोबाइल, कंप्यूटर इत्यादि। इन्हें ऐसे लोगों को दे दें जो इन्हें प्रयोग कर सकें। और आप भी अगर अपने यूज के लिए कहीं से कुछ प्राप्त कर सकें तो उसे लेने में झिझकें नहीं या शर्मिंदगी ना महसूस करें।
  • Recycle (रीसायकल): प्लास्टिक non-biodegradable है। अगर इसको जलायेंगे तो इससे डायोक्सिन तथा फ्यूरौन जैसे रसायन हवा के जरिये हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और गंभीर बीमारयों को न्योता देते हैं। इसलिए ऐसी चीजों को रीसायकल करना बहुत ज़रूरी है।

2. पेड़ लगाएं:

ये आप अच्छी तरह से जानते हैं, पर करते नहीं हैं। एक काम करिए इस बार जब आपका बर्थडे आये या आपके बच्चे का बर्थडे आये तो उस दिन एक पेड़ लगाइए और उसका कोई नाम रखिये…आपके या आपके बच्चे के साथ उसे भी बड़ा होते देखिये!

3. प्लास्टिक बैग्स को ना कहें:

Shopping के लिए Polythene या plastic bags का प्रयोग बंद कर दें। और इसके लिए किसी क़ानून का इंतज़ार मत करें, खुद से ये कदम उठाएं…. सब्जी के लिए, राशन के लिए, या कुछ भी बाज़ार से लाने के लिए पेपर बैग्स या कपड़ों के बने झोलों का प्रयोग करें।

4. बिजली बचाएं:

हम जितनी अधिक बिजली बचायेंगे उतनी कम बिजली प्रोड्यूस करनी पड़ेगी। भारत में कुल बिजली उत्पादन का लगभग 65% thermal power plants से होता है, जो कोयले का इस्तेमाल करते हैं और वातावरण में CO2, SO2 जैसी ज़हरीली गैस छोड़ते हैं.। हमारा बिजली बचाना हमारे वातावरण को बचाएगा।

5. पानी बचाएं:

Ground water level दिन प्रति दिन गिरता जा रहा है पर फिर भी लोग पानी की बर्बादी पर ध्यान नहीं देते। अगर हम छोटी-छोटी बातों पर ध्यान दें तो काफी पानी बचा सकते हैं। इस पर मैंने एक बहुत ही detailed article लिखा है, इस ज़रूर पढ़ें:पानी की बर्बादी रोकने के 18 तरीके

6. खाना बर्बाद ना करें:

क्या आप जानते हैं-

जितना खाना पूरा इंग्लैंड खाता है उतना हम भारतीय बर्बाद कर देते हैं।

जिनता खाना हो उतना ही लें बच जाता है तो कोशिश करें कि बाद में उसे consume कर लिए जाए। अन्न की बर्बादी ना करें। जितना अधिक हम अन्न उगाते हैं उतना ही अधिक प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव पड़ता है।

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7. Use and throw नहीं use and reuse करें:

पिछला दौर याद करिए। हम सीमित संसाधनों के साथ रहते थे…चप्पल टूटने पर मोची के पास जाया करते थे… कपड़ा फटता था तो रफ्फू करा लिया करते थे…मशीन ख़राब हुई तो बनवा लिया करते थे…लेकिन अब लोग use and throw के कल्चर को follow करने लगे हैं। इस आदत के कारण हम बहुत सारा WASTE खड़ा करते जा रहे हैं जो पृथ्वी के वातावरण को नुक्सान पहुंचा रहा है।

सीमित संसाधनों के साथ रहने में शर्मिंदगी नहीं गर्व होना चाहिए…. सचमुच ये गर्व की बात है!

8.पैदल चलें या साइकिल का प्रयोग करें:

आज कल हर कोई कार या बाइक से चलना चाहता है। पड़ोस की दुकान तक भी लोग पैदल या साइकिल से नहीं जाते….लेकिन पर्यावरण के संरक्षक होने के नाते आप ऐसा करिए, और environment को green & clean बनाइये।

9. अन्य जीवों के लिए करुणा रखें:

अपने घर की छतों में पक्षियों के पीने के लिए पानी रखें, संभव हो तो street dogs और cows के लिए भी घर के सामने पानी की व्यवस्था करें। पक्षियों के लिए बर्ड नेस्ट खरीदें और उन्हें सुरक्षित जगहों पर लगाएं। आप चाहें तो पुरानी चीजों का प्रयोग करके खुद भी बर्ड नेस्ट तैयार कर सकते हैं।घर में बचा खाना यदि किसी वजह से फेंका जा रहा है तो उसे डस्टबिन में मत फेंकिये बल्कि बाहर किसी जानवर को खाने के लिए डाल दीजिये।

10. कारपूलिंग करें:

ऐसे लोगों को तलाशें जो रोज आपके रूट से ट्रेवल करते हैं और उनके साथ carpooling करें। पार्टनर खोजने के लिए आप गूगल पर सर्च कर सकते हैं।

11. हैण्ड पाइप का प्रयोग करें:

काश मोटर का आविष्कार नहीं हुआ होता…कम से कम पानी की किल्लत तो नहीं होती….जब मैं छोटा था तब हम हैण्ड पाइप चला कर पानी भरते थे, obviously, जितनी ज़रुरत होती थी उतना ही पानी निकालते थे…साथ ही कुछ कसरत भी हो जाती थी…फिर एक दिन मोटर पंप लग गया और सिंटेक्स की काली टंकी में दनादन पानी भरने लगा…और हम पानी बर्बाद करने लगे…यदि आपके घर में हैण्ड पाइप लगा हो तो उसे प्रयोग करें…इससे बिजली भी बचेगी और पानी की बर्बादी भी रुकेगी!

मैं जानता हूँ, एक बार tap की आदत लगने के बाद नल का प्रयोग करना आसान नहीं है…मैं खुद ऐसा नहीं कर पाता….लेकिन किसी को तो example set करना होगा।

इनसे लें प्रेरणा – 10 inspiring stories

1) Sparrow Man अर्जुन सिंह व मोहम्मद दिलावर

बिहार के रोहतास जिले के नेराईपुर गाँव के अर्जुन सिंह ने जब एक साल के अंतराल पर अपने पिता और पत्नी को खो दिया तो उनका जीवन उदासी से भर गया..वो डिप्रेशन में जाने लगे।

लेकिन एक दिन जब वे अपने आंगन में टहल रहे थे तभी गौरैया का एक बच्चा उनके सामने आ गिरा…और उस दिन से अर्जुन जी ने पक्षियों से ऐसा रिश्ता बना लिया कि आज उनके हाते में विलुप्त प्राय प्रजातियों की 8000 से अधिक चिड़िया रह रही हैं।

नासिक के मोहम्मद दिलावर को दुनिया भर में sparrow conservation के लिए जाना जाता है। अपनी NGO Nature Forever Society (NFS) के माध्यम से वे इस दिशा में महत्त्वपूर्ण काम कर रहे हैं। March 20 को World Sparrow Day घोषित कराने में भी उनकी NGO की बड़ी भूमिका रही है।

2) जादव पायेंग: एक इंसान जिसने रेत को जंगल में बदल दिया

जी हाँ , जादव जी ने अपने अदम्य इच्छा शक्ति के दम पर तीस साल की कड़ी मेहनत से sandbar (रेती) के ढेर को जंगल बना दिया है। उनके बारे में मैं पहले ही AchhiKhabar.Com (AKC) पर लिख चुका हूँ: कृपया यहाँ पढ़ें.

3) ग्रैहम हिल – फाउंडर TreeHugger.Com

ग्रैहम minimalism में यकीन रखते हैं। वे अपना 3600sqft का घर छोड़ कर अब 420 sqft के स्टूडियो अपार्टमेंट में रहते हैं। कपड़ों के नाम पर उनके पास सिर्फ 6 shirt, आइये उनके या विडियो देखते हैं:

4) Prashant Lingam – founder Bamboo House India

प्रशांत लकड़ी के विकल्प में बांस प्रयोग करने की सलाह देते हैं क्योंकि सामान्य वृक्ष को दुबारा विकसित होने में 20 से 25 साल लग जाते हैं, जबकि बांस या bamboo tree रोज करीब 1 इंच बढ़ जाता है। प्रशांत बांस की मदद से इकोफ्रेंडली घर बनाते हैं जिससे न सिर्फ घर बनाना सस्ता पड़ता है बल्कि ग्रामीण इलाकों मे हज़ारों कारीगरों को रोजगार भी मिलता है।

प्रशांत जी की success story यहाँ पढ़ें

5) अभिलाष नरहरी – co- founder Elanic

अपनी अलमारी खोल कर देखिये, ऐसे तमाम कपड़े दिख जायेंगे जिन्हें आपनी महीनो या सालों से नहीं पहना होगा…अभिलाष ऐसे ही कपड़ों को ऑनलाइन सेल करने की सुविधा देते हैं ताकि किसी ज़रूरतमंद को कम दाम में अच्छे कपड़े मिल जाएं।

6) अंजू व अरुण ने Green Wedding की मिसाल कायम की:

केरल के अरुण व अंजू अनिरुद्धन ने फैसल किया कि वे ऐसी शादी करेंगे जिसमे प्रयावरण को नुक्सान ना पहुंचे। और उन्होंने ऐसी शादी की जिसमे विवाह मंडप से लेकर खाने-पीने तक की चीजों में इकोफ्रेंडली material का इस्तेमाल हुआ।

शायद आपको भी याद हो पहले जब हम शादियों में जाते थे तो पत्तलों में खाना खिलाया जाता था और मिटटी से बने कुल्लहड़ में पानी पिलाया जाता था…लेकिन अब प्लास्टिक की थालियाँ और डिस्पोजेबल कप्स आम हो अगये हैं… अरुण और अंजू की तरह हमें भी पुराने तरीकों की तरफ लौटना होगा।

7) दीपा की दरिया दिल दुकान

खुद को प्रकृति से जोड़ने वाली दीपा कभी hi-fi lifestyle में यकीन करती थीं, पर एक बार किसी वर्कशॉप में उन्होंने समझा कि किस तरह से प्रकृति, पशु और पर्यावरण के साथ संतुलन स्थापित किया जा सकता है। इसके बाद न उन्हें महंगी गाड़ियों का शौक रहा न महंगे कपड़ों का।

उनका कहना है- “आज मेरा एक ही सिद्धांत है, जो पास में है उसका इस्तेमाल करूँ। दूसरों को भी यही सलाह देती हूँ। सामान की अदला-बदली करें। घर में उतनी ही हरी सब्जी लाएं जितनी ज़रुरत हो।”

दीपा ने “दरिया दिल दुकान” नाम से एक फोरम शुरू किया है जिसपर आप अपनी useless चीजों को दान कर सकते हैं। ऐसा करके आप फ़ालतू के प्रोडक्शन को रोक सकते हैं और प्राकृतिक संसाधनों के हनन को कम कर सकते हैं।

8) वरुण कालिया ने कूड़े के ढेर को खूबसूरत झील में बदला

अम्बाला कैंटोनमेंट बोर्ड के CEO, वरुण कालिया जी ने अपनी दृढ इच्छाशक्ति के दम पर कूड़े के अम्बार को एक झील में बदल दिया।

दैनिक जागरण पर पूरी खबर पढ़ें

9) विजय कुमार मिश्र से सीखें पेड़ लगाना

उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले के श्री विजय कुमार मिश्र हर साल 500 पौधे लगाते हैं और उनकी देखभाल करते हैं। उनका मानना है कि –

बेहतर पर्यावरण के लिए पौधारोपण से अच्छा कोई विकल्प नहीं है।

उनका प्रकृति प्रेम व लगन देख कर उनके आस-पास के गाँवों में रहने वाले बहुत से लोग भी यही वृक्षारोपण में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने लगे हैं।

10) मैंने भी कुछ किया है:

मेरे घर में 5 पानी की टंकियां हैं (…including those of tenants), जिससे पानी भर कर गिरता था…मैंने सभी में water-flow alarm लगा दिया जिस वजह से पानी भरते ही पता चल जाता है और लोग मोटर बंद कर देते हैं…इसके बाद मैंने अपनी कॉलोनी के भी कुछ घरों में ये अलार्म लगवाया…I think, मेरे इस छोटे से स्टेप से हम हर साल लगभग 50,000 से 1 लाख लीटर पीने के पानी बर्बाद होने से बचा पा रहे हैं।

दोस्तों, वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे 2017 की थीम “प्रकृति से जुड़ने” के बारे में है। बहुत से लोग इस लेख को पढेंगे आर भूल जायेंगे….लेकिन आपसे विनम्र निवेदन है कि please आप nature से connect होइए….कुछ न कुछ ऐसा करिए जिससे हमारे पर्यावरण को लाभ पहुंचे…I am sure, आप ऐसा कर सकते हैं और ज़रूर छोटा-बड़ा…कुछ न कुछ ज़रूर करेंगे…

याद रखिये….माँ की भी सहने की एक क्षमता होती है…वह बच्चों को खूब पुचकारती है….लाड-प्यार देती है लेकिन जब बच्चा नहीं मानता तो वो उसे थप्पड़ भी लगा देती है….अब तक धरती माँ भी हमें पुचकार रही है….प्यार कर रही है….लेकिन जिस दिन वो रूठ गयी उसका थप्पड़ मानव सभ्यता की नीव तक हिला के रख देगा!

चलिए सुधर जाते हैं….प्रकृति की गोद में फिर लौट जाते हैं!

Thank You

Gopal Mishra

क्या पर्यावरण को बचाने के लिए आपके पास भी कोई अच्छा आईडिया है? यदि हाँ तो please comment के माध्यम से share करें.

विश्व पर्यावरण दिवस से सम्बंधित लेख

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